नैतिक शिक्षा वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से लोग दूसरों में नैतिक मूल्यों का संचार करते हैंl पहले के समय में लोग अपनों बच्चो को कहानी के माध्यम से नैतिक शिक्षा का ज्ञान देते थे l आज के समय में ये सब जाने कहां गायब हो गया है, आजकल बच्चे घंटो तक मोबाइल में लगे रहते है, दोस्तों ये सोचने का विषय है l जो बच्चे देश का भविष्य है वो अपना अनमोल समय व्यर्थ की चीजों में, विडिओ गेमिंग, मोबाइल, आदि में लगा देते है l
दोस्तो “व्यक्तियों के समूह को हीं समाज कहते है। जैसे व्यक्ति होंगे वैसा ही समाज बनेगा। किसी देश का उत्थान या पतन इस बात पर निर्भर करता है कि इसके लोग किस स्तर के हैं और यह स्तर बहुत हद तक उन लोगो की शिक्षा-पद्धति पर निर्भर करता है। व्यक्ति के निर्माण और समाज के उत्थान में नैतिक शिक्षा का अत्यधिक महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। प्राचीन काल में ऋषियों द्वारा गुरुकुल में ये शिक्षा दी जाती थी | पिछले दिनों भी जिन देशों ने भी अपना भला-बुरा निर्माण किया है, उसमें शिक्षा को ही महत्वपूर्ण साधन बनाया है। व्यक्ति का बौद्धिक और चरित्र का निर्माण बहुत सीमा तक उपलब्ध शिक्षा प्रणाली पर निर्भर करता है l
आज ऐसी शिक्षा की आवश्कता है, जो पूरे समाज और देश में नैतिकता उत्पन्न कर सके। यह नैतिकता नैतिक शिक्षा के द्वारा ही उत्पन्न की जा सकती है। चूँकि नैतिकता सब्द ‘नीति’ से बना है । इसका अर्थ होता है ऐसा व्यवहार, जिसके अनुसार अथवा जिसका अनुकरण करने से सबकी रक्षा हो सके । अतः हम कह सकते हैं कि नैतिकता वह गुण है, और नैतिक शिक्षा वह शिक्षा है, जो कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति सम्पूर्ण समाज तथा देश का हित कर सकती है।
सामाजिक जीवन की व्यवस्था के लिए कुछ नियम बनाए जाते हैं, जब ये नियम धर्म से संबंधित हो जाते हैं तो उन्हें नैतिक नियम कहते हैं और उनके पालन करने के भाव अथवा शक्ति को नैतिकता कहते हैं। धर्म और नैतिकता मनुष्य की आधारभूत आवश्यकता है। बिना उनके उसे मनुष्य नहीं बनाया जा सकता, अतः इनकी शिक्षा की व्यवस्था अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।
दोस्तो मेरे विचार से तो हमें नैतिक शिक्षा का ज्ञान अपने घर में अपने आने वाली पीडियो के लिए संस्कार के रूप में उतार लेने चाहिए, जिससे नैतिक शिक्षा एक विषय ना होकर, एक संस्कार के रूप में जाना जाये l

